राजीव गांधी का भारत रत्न वापिस लिया जाए, 84 के दंगे में सेना क्यों नही बुलाया गया

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1991 में मर चुके देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में एक नया खुलासा जब से सामने आया है. राजनीती गलियारों में हलचल तब से ही तेज़ हो चुकी हैं. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने यह मांग की है की राजीव गांधी से भारत रत्न वापिस लेना चाहिए.

सुखबीर सिंह बादल का कहना है की अगर उस समय के गृहमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को राजीव गांधी ने सेना बुलाने की इज्जाजत दे दी होती तो दिल्ली में सिखों के क़त्ल रुक सकते थे. सुखबीर सिंह बादल ने कहा की अब तो बात साफ़ हो चुकी है की पीवी नरसिम्हा राव सेना को दिल्ली बुलाना चाहते थे, लेकिन राजीव गांधी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने उन्हें मंजूरी नहीं दी.

सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा की, “पूरा सिख समुदाय इस बात से आक्रोशित है कि एक व्यक्ति, जिसने हजारों सिखों के दमन की योजना बनाई और उसकी देखरेख में इसे रोकने की अपील को नजरअंदाज किया गया, उसे देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दे दिया गया. इस अन्याय को सुधारा जाना चाहिए. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूँ कि राजीव गाँधी से तत्काल इस सम्मान को वापस लिया जाए.”

उन्होंने अपना ब्यान जारी रखते हुए आगे कहा की, “राजीव गाँधी और उन सभी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए, जिन्होंने कांग्रेस के गुंडों द्वारा लूटमार को रोकने के लिए सेना को दिल्ली में आने से रोका था. राजनीतिक नेताओं और उन अफसरों को, जो इस अपराध के लिए जिम्मेदार हैं, को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. इससे भविष्य की पीढ़ी के सामने ऐसी बर्बरता करने वालों के प्रति सबक पेश किया जा सकेगा.”

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सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के माजूदा मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधा हैं. उन्होंने कहा है की, “आखिर क्यों वो अभी तक इस मामले पर चुप हैं और गाँधी परिवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान से खुलासा हो गया है कि कांग्रेसी गुंडों के नेतृत्व में किए जा रहे नरसंहार को रोकने के लिए राजीव गाँधी ने सेना को इजाजत नहीं दी थी. यह दिखाता है कि आपके लिए गाँधी परिवार की गुड बुक्स में रहना और अपनी कुर्सी को बचाना, अपने समुदाय के साथ खड़े होने और इसके खिलाफ नरसंहार करने वालों के लिए कठोर सजा की माँग करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है.”