राम मंदिर निर्माण का अंतिम अड़चन भी खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुर्नविचार याचिका को किया खारिज

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सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस वक़्त बड़ी खबर आ रही हैं, जिसमे चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस संजीव खन्ना ने अयोध्या फैसले से जुडी सभी की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया हैं.

आपको बता दें की 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन राम मंदिर को बनाने के लिए दी थी. इसके इलावा मुस्लिम पक्ष के लिए राज्य सरकार को पांच एकड़ जमीन देने के लिए कहा गया था.

9 नवंबर को आए फैसले के खिलाफ कुल 18 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गयी थी. इन सभी याचकाओं को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना 9 नवंबर का फैसला बरकरार रखा हैं. इसी फैसले के साथ यह भी मुद्दा भी ख़त्म हो गया.

पुनर्विचार याचिका में कहा गया था की, “1857 के बाद से मूर्तियां बाहरी प्रांगण में थीं. यह आपराधिक अतिक्रमण के जरिए 22-23 दिसंबर 1949 को यहां जबरन रखे जाने के अलावा कभी अंदरूनी भाग में नहीं थीं. अदालत ने स्वीकार किया कि मूर्तियों को अवैध रूप से आंतरिक प्रांगण में रखा गया था और फिर भी मुस्लिम पक्ष के खिलाफ आदेश दिया गया.”

इस याचिका में अपील डालने वालों ने इस बात का हवाला देते हुए लिखा था, “यह स्वीकार करते हुए कि स्वामित्व के उद्देश्य से अंग्रेजों द्वारा बनाई गई रेलिंग असंगत है और यह मान लेना पूरी तरह से गलत है कि हिंदू कब्जे या स्वामित्व के लिए दावा कर सकते हैं.”

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याचिका में आगे कहा गया था की, “एएसआई का निष्कर्ष था कि यह साबित नहीं किया जा सकता है कि एक मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई. संभावनाओं के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि 1528-1856 के बीच मुसलमान वहां नमाज नहीं पढ़ते थे, क्योंकि इस दौरान यह स्थल मुगलों व बाद में नवाबों के शासन के अधीन था.”

पुर्नविचार को लेकर सबसे पहली याचिका रशीदी मूल वादी एम सिद्दीक और उत्तर प्रदेश जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अशद रशीदी 2 दिसंबर को दायर की गयी थी.