Thursday, December 8, 2022

Shiv Sena पर Supreme Court का बड़ा फैसला ! अब पता चलेगा असली ‘शिवसैनिक’ कौन…

Shiv Sena के स्वामित्व पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है की इसका फैसला अब चुनाव आयोग कर सकेगा। चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ (Constitution Bench) ने रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने उद्धव गुट की अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया है।

Shiv Sena

उद्धव गुट की याचिका ख़ारिज!

आपको बता दें की उद्धव गुट ने चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने पर रोक लगाने की मांग राखी थी।जिसपर Supreme Court की एक संविधान पीठ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें निर्वाचन आयोग को ‘असली’ Shiv Sena को लेकर शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे के दावे पर निर्णय लेने से रोकने का अनुरोध किया गया था। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है की चुनाव आयोग अपना फैसला दे सकता है। साथ ही अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला जारी रहेगा।

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Shiv Sena पर पहले भी हुई सुनवाई!

आपको बता दें की गत 23 अगस्त को Shiv Senaऔर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Eknath Shinde की ओर से दाखिल उन याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया गया था जिनमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से जुड़े कई संवैधानिक सवाल उठाए गए थे। इसने निर्वाचन आयोग से शिंदे खेमे की याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं करने के लिए कहा था जिसमें कहा गया था कि उसे ‘असली’ शिवसेना माना जाए और पार्टी का चुनाव चिह्न दिया जाए.पीठ ने ये भी कहा था कि याचिकाएं संविधान की 10वीं अनुसूची से जुड़े कई अहम संवैधानिक मुद्दों को उठाती हैं, जिनमें अयोग्यता, अध्यक्ष एवं राज्यपाल की शक्तियां और न्यायिक समीक्षा शामिल है।

क्या कहती है 10वीं अनुसूची ?

संविधान की 10वीं अनुसूची में निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के उनके राजनीतिक दलों से दलबदल की रोकथाम का प्रावधान है और इसमें दलबदल के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं। ठाकरे खेमे ने पहले कहा था कि शिंदे के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी विधायक किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय करके ही संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से खुद को बचा सकते हैं। शिंदे खेमे ने दलील दी थी कि दलबदल रोधी कानून उस नेता के लिए कोई आधार नहीं है जिसने अपनी ही पार्टी का विश्वास खो दिया है।

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