मध्यप्रदेश-राजस्थान की स्थिति देख,महाराष्ट्र की राजनीति में उथल पुथल,शरद पवार का बड़ा बयान…

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एनसीपी चीफ शरद पवार ने बोला है कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की सरकार है, जो किसी भी रिमोट कण्ट्रोल से नहीं चल रही है। ”सामना” को दिए गए इंटरव्यू में पवार ने ये बोला कि सरकार को सीएम उध्दव ठाकरे और उनके मंत्री चला रहे है। इसके साथ ही पवार ने ये भी बोला कि बालासाहेब ठाकरे और बीजेपी की सोच तथा शैली में बहुत अंतर था। आइये पड़ते है उनके इंटरव्यू –

शरद पवार : – मेरा स्पष्ट मत ये है कि विधानसभा में उनके बीजेपी के विधायकों का जो 105 फिगर हुआ, उसमे शिवसेना का योगदान बहुत ही बड़ा था। अगर उसमे शिवसेना शामिल नहीं होती तो इस बार 105 नहीं बल्कि 40-50 के करीब साइट मिली होती है। बीजेपी के लोग ये कहते है कि 105 विधायक होने के बावजूद सहयोगी मतलब की शिवसेना ने इसे नजरअंदाज किया अथवा सत्ता से दूर रखा। उन्हें 105 तक पहुंचाने का काम किया है जिन्होंने उन्ही के प्रति ग़लतफ़हमी भरी भूमिका अपने है तो मुझे भी नहीं लगता कि औरो को कुछ अलग करने की जरुरत है मैं जिन बालासाहेब ठाकरे को जानता हूँ। मेरी तुलना में आप लोगो को शायद मुझसे ज्यादा जानकारी होगी। लेकिन बालासाहेब की पूरी विचारधारा, काम करने की शैली भारतीय जनता पार्टी के अनुरूप थी ऐसा मुझे कभी महसूस ही नहीं हुआ।

बताता हूँ ना। इन सबकी वजह ये है कि बालासाहेब की भूमिका और बीजेपी की विचारधारा में अंतर था। खासकर काम की शैली में जमीं आसमान का अंतर है। बालासाहेब ने कुछ व्यक्तियों का आदर किया है। बालासाहेब ने कुछ व्यक्तियों का आदर किया है। उन्होंने अटलबिहारी बाजपेयी का? आदर किया है। उन्होंने आडवाणी का किया है। उन्होंने प्रमोद महाजन का भी आदर किया है। उन सभी को सम्मान देकर उन्होंने एक साथ आने का विचार किया और आगे सत्ता आने में सहयोग दिया है। और दूसरी बात ऐसी थी कि कांग्रेस ने उनका संघर्ष था, ऐसा मुझे नहीं लगता। शिवसेना हमेशा ही कांग्रेस के विरोध में ही थी, ऐसा नहीं है।

हां, बालासाहेब वैसे ही थे। जितने वो बिंदास है उतने ही वो दिलदार भी है राजनीती में वैसी दिलदारी मुश्किल है शायद बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना देश का ऐसा पहला दल है कि किसी राष्ट्रिय मुद्दे पर सत्ताधारी दाल के प्रमुख लोगो का खुद के दल के भविष्य की चिंता न करते हुए समर्थन करते थे। आपातकाल में भी पूरा देश इंदिरा गाँधी के विरोध में था। उस टाइम अनुशासित नेत्र्तव के लिए भी बालासाहेब इंदिरा गाँधी के साथ खड़े थे। वो सिर्फ उनके साथ खड़े ही नहीं थे बल्कि लोगो के लिए चौकाने वाली बात तो ये भी थी, कि उन्होंने बोला कि महाराष्ट्र के चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारने का एलान कर दिया है।

दोनों में से कोई नहीं है। हेडमास्टर तो स्कुल में होना चाहिए। लोकतान्त्रिक में सरकार का या फिर प्रशासन में कभी भी रिमोट से नहीं चलता। रिमोट चलता कहा है? जहा लोकतंत्र नहीं है वहां। हमने रूस का उदाहरण देखा है। पुतिन वहा 2036 तक अध्यक्ष रहेंगे। वो अब एकतरफा सत्ता है लोकतंत्र आदि एक तरफ रख दिया है। इसलिए ये बोलना की हम जैसे बोलेगे सरकार वैसे ही चलेगी, ये तो एक तरह की जिद हुई। यहां लोकतंत्र की सरकार है और लोकतंत्र की सरकार रिमोट कंट्रोल से कभी नहीं चल सकती। मुझे ये सब कुछ बिलकुल भी स्वीकार नहीं है जो मुख्यमंत्री की सरकार और उनके मंत्री चला रहे है।