भारतीय कंपनी पर जम कर बरसे रतन टाटा,बोले अपने ही एम्प्लॉय को कोरोना काल मे निकाल देना,शर्म की बात…

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Ratan Tata’s anger at the Indian company: टाटा के संस्थापक (Founder of TATA Group) रतन टाटा ने गुरुवार को इंटरव्यू के दौरान कोविड-19 (COVID-19) महामारी की वजह से भारतीय कंपनियों में हो रही छटनी को लेकर अपनी नाराजगी को व्यक्त किया है! उनका कहना है कि ऐसे मुश्किल वक्त में लोगों के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी बनती है! रतन टाटा (Ratan TATA) ने कहा कि भारत की कंपनियों के द्वारा नौकरी से निकल जाने की बातें सुनकर तो यह लगता है कि जैसे कंपनियों के टॉप लीडरशिप में सहानुभूति की कमी हो गई है!

वेबसाइट YourStory को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने आपकी कंपनी के लिए काम किया है! यह वही लोग हैं जिन्होंने अपना पूरा क्लियर अपनी पूरी जिंदगी आपकी कंपनी में लगा दी है! अब ऐसे संकट के समय आप इनका सपोर्ट करने की वजह इनको बेरोजगार कर रहे हैं! टाटा समूह के संरक्षक (Tata Group Patriarch) का कहना है कि उद्यमियों और कंपनियों के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता सबसे ऊपर है!

उनका कहना है कि इस महामारी के दौर में आप अपने ही कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं क्या यही आपकी नैतिकता है? इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने बिजनेस को लेकर अपना एक्सपीरियंस बताते हुए अपनी सोच बताते हुए कहा कि बिजनेस का मतलब सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं होता! इसमें बेहद जरूरी होता है कि स्टेकहोल्डर्स, कस्टमर्स और कर्मचारी आप से जुड़े रहे और उनके हितों को भी ध्यान में रखा जाए!

जानकारी के लिए बता देती है टाटा समूह ने इस संकट के दौर में सीनियर मैनेजमेंट की सैलरी में 20% तक की कटौती का फैसला किया है लेकिन वही एयरलाइन से लेकर ऑटो बिजनेस सेक्टर में किसी की भी छटनी नहीं की गई! बता देगी रतन टाटा के ग्रुप में इस महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार को 1500 करोड़ रुपए का योगदान दिया है!

उन्होंने कहा कि कंपनियों का मुनाफा कमाना गलत नहीं है! लेकिन इस काम को नैतिक रूप से करना भी जरूरी है! यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि आप मुनाफा कमाने के लिए क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि कंपनियों के लिए यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मुनाफा कमाने के दौरान ग्राहकों और शेयरधारकों के लिए क्या मूल्य जोड़ा जा रहा है! ये सभी पहलू महत्वपूर्ण हैं! मौजूदा स्थिति में, प्रबंधकों को खुद से सवाल पूछना जारी रखना चाहिए, क्या वे निर्णय सही ले रहे हैं?

रतन टाटा ने कहा कि जब देश में कोरोना महामारी का प्रकोप शुरू हुआ, तभी हजारों लोगों को निकाल दिया गया था! क्या इससे आपकी समस्या हल हो सकती है? उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि आपने व्यापार में नुकसान उठाया है, तो लोगों को नौकरियों से बाहर करना भी सही नहीं है! बल्कि, उनके प्रति आपकी एक जिम्मेदारी है! उन्होंने कहा कि कंपनी लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकती है, जो अपने लोगों के बारे में संवेदनशील नहीं है!