राजदीप सरदेसाई ने किया न्यायाधीश अरुण मिश्रा के खिलाफ ट्वीट, लोगों की नाराजगी के बाद किया डिलीट

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राजस्थान में चल रही सियासत के बीच देश की सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया है! सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हाई कोर्ट का फैसला आने दीजिए उसके बाद हम सोमवार को फिर से इस मामले की सुनवाई करेंगे! गौरतलब है कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राजस्थान विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश होते हुए यह दलील दी थी कि हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया जाए किसी भी फैसले से पहले विधानसभा अध्यक्ष के मामले में दखल नहीं दिया जा सकता है! हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी से भी सचिन पायलट और 18 विधायक की ओर से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है! इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी!

बता दें कि राजस्थान में चल रही सियासी हलचल के बीच राजस्थान के स्पीकर ने पिछले हफ्ते सचिन पायलट और अन्य विधायकों को नोटिस जारी किया था! इस मामले में अध्यक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट स्पीकर के द्वारा किसी भी कार्यवाही से पहले कोई याचिका दायर नहीं कर सकता! हालांकि कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट की इस आदेश के बाद एक बड़ा झटका लगा है! बुआ को सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राजस्थान हाई कोर्ट शुक्रवार को नेताओं के खिलाफ याचिका पर अपना फैसला घोषित कर सकता है लेकिन अंतिम आदेश सुप्रीम कोर्ट के अधीन होगा!

स्पीकर सीपी जोशी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान यह कहा कि विरोध की आवाज में लोकतंत्र में दबाया नहीं जा सकता! बता दें कि सीपी जोशी ने बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 विरोधी कॉन्ग्रेस विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने के कारणों पर सवाल उठाया था! अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस पार्टी और उसकी मीडिया इकोसिस्टम इस बात को लेकर परेशान है कि जैसा उन्होंने सोचा था वैसा कोर्ट ने आदेश नहीं दिया! अपने पाले में फैसला नहीं आने से नाराज लोगों ने न्यायपालिका के खिलाफ ही हमला बोल दिया है!

राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराश होकर अपने मन की भड़ास ट्विटर पर निकाली! उन्होंने ट्विटर पर न्यायाधीश अरुण मिश्रा के खिलाफ टिप्पणी की! राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जस्टिस का नाम घसीटते हुए कहा कि यह महिला मिश्रा है जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को बहुमुखी प्रतिभा के रूप में वर्णित किया था! राजस्थान रूप से यह साफ कर दिया कि जस्टिस अरुण मिश्रा द्वारा सचिन पायलट के पक्ष में लिया गया निर्णय और कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी के लिए की गई उनकी प्रशंसा, इन दोनों का आपस में कोई मेल है! इस फैसले के बाद पत्रकार सरदेसाई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर समाज भी खड़ा कर दिया है इसके साथ ही उन्होंने अदालत की भी अवमानना की है!

राजदीप सरदेसाई के द्वारा जब यह ट्वीट किया गया तो सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताई! जिसके बाद उन्होंने तुरंत अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया! उनको एहसास हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिए गए उनके इस बयान की वजह से उन पर अदालत की अवमानना का आरोप भी लग सकता है!