सावरकर के पोते का बयान: उद्धव ठाकरे को राहुल गांधी की सबके सामने पिटाई करनी चाहिए

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स्वतंत्रता सेनानी वीर दामोदर दास सावरकर को लेकर दिए फ़िरोज़ खान के पोते राहुल गाँधी के ब्यान पर अब विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा. महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चलाने वाली शिवसेना के लिए राहुल गाँधी का ब्यान गले की हड्डी बन गया हैं, जिसे न तो निगला जा सकता है और न ही उगला जा सकता हैं.

हालाँकि शिवसेना के संजय राउत ने ब्यान दिया था की, “सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व”. अब खुद स्वतंत्रता सेनानी वीर दामोदर दास सावरकर के पोते ने मीडिया से बात करते हुए राहुल गाँधी की आलोचना की.

रंजीत सावरकर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है की, “यह अच्छा है कि राहुल गॉंधी, राहुल सावरकर नहीं हैं. ऐसा होता हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता. अब हम उम्मीद करते हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे. वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे. मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा.”

अभी सूत्रों की माने तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी राहुल गाँधी के इस दो कौड़ी के ब्यान पर बेहद नाराज़ नज़र आ रहें हैं और उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को कहा है की, “मैं इस मसले पर खुद कांग्रेस आलाकमान से बात करूंगा. ऐसे बयानों से बचा जाए जो गठबंधन के लिए ठीक नहीं है”.

उद्धव ठाकरे का रुख साफ़ होने के बाद संजय राउत भी पुरे फॉर्म में आ गए और लिखा की, “वीर सावरकर को लेकर राहुल गाँधी ने जो कुछ भी कहा, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं से अपील करता हूँ कि वो वीर सावरकर के साहित्य को राहुल गाँधी को भेजें. महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं को दिल्ली जाकर राहुल गाँधी को सावरकर की किताबें गिफ्ट करनी चाहिए, ताकि वो सावरकर को समझ सकें और उनकी गलतफहमी दूर हो सके. कांग्रेस नेताओं को राहुल गाँधी को यह भी बताना चाहिए कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ किस तरह संघर्ष किया था और लड़ाई लड़ी थी”.

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उन्होंने आगे कहा की, “वीर सावरकर न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श हैं. सावरकर का नाम राष्ट्र और स्वयं के बारे में गौरव को दर्शाता है. नेहरू और गाँधी की तरह सावरकर ने भी देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया. ऐसे प्रत्येक आदर्श को पूजनीय मानना चाहिए. इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता”.