देखें वीडयो: जामिया वालों को हिन्दू से चाहिए थी आजादी, अब दिल्ली पुलिस दे रही सॉलिड आजादी

0
320
police-entering-jamia-millia-islamia-campus-1
Pic Credit - Google Images
police-entering-jamia-millia-islamia-campus-3
Pic Credit – Google Images

आज दिल्ली में जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने नागरिकता संशोधन बिल को लेकर दिल्ली में जगह-जगह बसों को आग के हवाले किया. शांतिप्रिय प्रदर्शन का ऐलान करके जब मुस्लिम समुदाय लोगों ने बसों को आग के हवाले किया तो, पुलिस ने बताया यह लोग पूरी त्यारी के साथ आए थे.

जिसके बाद पुलिस ने वापिस कार्यवाही करते हुए जामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में पूरी फाॅर्स के साथ लाठीचार्ज कर दिया. लाठीचार्ज करने से पहले पुलिस ने यूनिवर्सिटी के दोनों गेट को बंद कर दिया था जिसके बाद “हिन्दुवों से चाहिए आज़ादी” का नारा लगाने लोगों और शांतिप्रिय प्रदर्शन के नाम पर आग लगाने विद्यार्थियों को जमकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

जामिया यूनिवर्सिटी का इससे पहले एक वीडियो सामने आया था जिसमे वह कश्मीरी पथरबाज़ों के तर्ज़ पर पुलिस पर पत्थर फेंक रहे थे. कश्मीर पर कांग्रेस का यह कहना था की वहां अनपढ़ता है, इसलिए पथरबाज़ पत्थर फेंकते हैं लेकिन जामिया यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के बारे में क्या कहेंगे?

ऐसे में सवाल वही आता है की अगर अनपढ़ता के कारण कोई आतंकवाद बनता तो अपनी यूनिवर्सिटी का टॉप इंजीनयर ओसामा बिन लादेन आतंकवादी न बनता. फिलहाल पुलिस की इस कार्यवाही पर सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर तारीफ की हैं.

लेकिन इस कार्यवाही में चोटिल हुए विद्यार्थियों का असली गुनाहकार कौन हैं? क्या वे खुद हैं जो पढ़े लिखे होने के बावजूद घुसपैठिये और शरणार्थी का फर्क नहीं समझते, क्या कांग्रेस और उसके साथी दल है जो इन विद्यार्थियों को गुमराह कर रही हैं या फिर वो किताब जिसको पढ़ने के बाद अनपढ़ और पढ़े-लिखे दोनों तरह के इंसान हिंसक मानसिकता से ग्रस्त हो जाते हैं.

फिर वो कहते है की हम तो अल्पसंख्यक हैं, सवाल तो यह भी उठता है की मात्र 20 प्रतिशत होने पर एक कानून के बनने पर देशभर में इतना बवाल है. ऐसे में अगर इनकी संख्या 50 प्रतिशत हो जाये तो देश का क्या हाल होगा, कश्मीरी पंडितों से पूछना ज्यादा सही रहेगा.