Tuesday, September 27, 2022

माता-पिता कहते थे दादी अपने रिश्तेदार के घर है,लेकिन पोती को अचानक मिल गई वृद्धाश्रम में..

कहते है दुनिया में बेहद जरूरी है माँ बाप का साथ और माँ के आँचल में संसार के सारे सुख है। और पिता के साथ सब आसान है। दादा दादी के आशीर्वाद से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। पर फिर भी जो अपना सुकून छोड़ने वाले माँ बाप जो बस अपने बच्चो के लिए अपना जीवन संघर्ष करते है।

उनके संघर्ष और प्यार की कीमत कभी चुकई नहीं जा सकती है। तो फिर भी बच्चो को क्यों उनके साथ में आपत्ति है। जब बच्चा छोटा होता है तो माँ बाप उस बच्चे के लिए जी जान से मेहनत करते है। पर उन्ही बच्चो को वो बुजुर्ग माँ बाप बोझ लगते है। वो उन्हें छोड़ देते है। लाचार और बेसहारा कर देते है।

दादी को पाया वर्ध आश्रम में

कुछ ऐसा ही एक वाकया देखने को मिला गुजरात में। एक स्कूल ने बच्चो को एक वृद्ध आश्रम में ले गए। जहा पर एक बच्ची ने जो मंजर देखा तो बस वो स्थम्ब रह गई। उन छोटी बच्ची ने अपनी दादी को वृद्ध आश्रम में पाया जिसको देख वो बिलख बिलख के रोने लगी। बच्ची ने बताया जब भी वो अपनी दादी के बारे में अपने माँ बाप से पूछती थी। तो उस बच्ची के माँ बाप उससे ये बताते थे की उसकी दादी रिश्तेदार के यहाँ गई हुई है।

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क्या बोझ है बुजुर्ग माँ बाप

ये बात तो वर्ष 2018 की है और तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पर हैरानी होती है ये देख कर की माँ बाप की कीमत बुढ़ापे में नहीं होती है।

क्या उनके दुवारा दीया हुआ योगदान किसी काम का नहीं है। बच्चे माँ बाप का ख्याल क्यों नहीं करते उन्हें यु अकेला क्यों कर देते है।

और फिर अगर ये सब भी उन्ही के साथ हो उनके बच्चे भी जब उनको छोड़ते तो।

जब तक मतलब था तक ही साथ दिया और जब उन्हें साथ की ज़रूरत थी। तभी उन्हें छोड़ दिया उन्हें बोझ समजा धित्कार है ऐसे लोगो पर।

ऐसे लोग ही समाज को गलत सन्देश देते है।

फिर ये किस को दोष देते फिरेंगे।

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