शिवसेना ने पेश किया सेकुलर होने का सबूत, जताया ‘नागरिकता संशोधन बिल’ का विरोध

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आज सोमवार को बीजेपी लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पेश करने जा रही हैं. इस बिल का आधार पड़ोसी देशों से धर्म के आधार पर निकाले गए परिवारों को नागरिकता प्रदान करना हैं. अब क्योंकि भारत के आसपास दो मुख्य देश मुस्लिम हैं तो वहां मुस्लिमों को तो धर्म के आधार पर निकालेंगे नहीं.

ऐसे में बीजेपी में इस बिल में केवल गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने का प्रावधान दिया हैं. अब क्योंकि मामला गैर मुस्लिमों और मुस्लिमों के बीच का है तो मुस्लिम राजनीती करने वाले नेताओं के लिए अपनी इज्जत बचाने वाली बात हैं.

इसलिए ज्यादातर वो पार्टियां इस बिल का विरोध कर रहीं हैं, जो पार्टियां अक्सर मुस्लिम राजनीती करती नज़र आती हैं. नई-नई सेकुलर पार्टी बनी शिवसेना भी अब मुस्लिम वोटरों को खुश करने के लिए इस बिल का विरोध कर रही हैं.

शिवसेना ने बीजेपी पर आरोप लगाया हैं की बीजेपी हिंदू मुसलमान के बीच अदृश्य बंटवारा करने की कोशिश कर रही हैं. आपको बता दें की बीजेपी के सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पहले ही इस बिल पर सफाई दे चुके है, जिसमे उन्होंने कहा था की, “मुझे विश्वास है कि जब विधेयक के प्रावधानों की घोषणा होगी तो असम समेत पूर्वोत्तर और संपूर्ण भारत में इसका स्वागत किया जाएगा.”

अमित शाह ने भी आज सदन में कहा है की कांग्रेस हम पर यह इल्जाम लगा रही है की, हमने धर्म के आधार पर यह बिल पेश किया हैं. जबकि उन्होंने खुद धर्म के आधार पर देश का बंटवारा कर दिया था. इसके बाद विपक्ष ने जमकर हंगामा किया तो अमित शाह ने कहा आपको आज सुनना पड़ेगा और आज ही नहीं अगले पांच सालों तक सुनना पड़ेगा.

हालाँकि संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर सुबह ट्वीट किया था की, “अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और उन्हें 25 सालों तक मताधिकार न दें. इपर आप क्या कहते हैं? और हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ? क्या वह आर्टिकल 370 हटने के बाद वापस कश्मीर लौट गए.”

संजय राउत के इस ट्वीट के बाद लोगों ने जमकर उनकी क्लास भी लगाई जिसके कुछ नमूने निचे दिए हैं…