Thursday, December 8, 2022

गांधी परिवार के “कटप्पा” हैं मल्लिकार्जुन खड़गे? राहुल-प्रियंक के हैं पिता..

Congress पार्टी के चुने गए नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पार्टी के सदस्यों द्वारा चुना गया है। और उनकी गिनती गांधी परिवार के बेहद करीबियों में होती है। कर्नाटक के ‘सोलिलादा सरदारा’ यानी ‘अजेय सरदार’ खरगे को अगर उनकी बेदाग वफादारी के लिए कांग्रेस के ‘प्रथम परिवार’ का ‘कटप्पा’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

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Congress का गाँधी परिवार के लिए जूनून कुछ अलग !

वैसे Congress party में गांधी परिवार के लिए अजीबो- गरीब जुनून की कहानियां भरी पड़ी हैं। किसी ने इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में विमान को अपहरण कर कांग्रेस पार्टी के प्रति जूनून को दर्शाया, तो किसी ने सोनिया गांधी के लिए अपनी कनपटी पर पिस्तौल को तान दिया। ऐसे कई उदाहरण हैं हमने देखे है जब कांग्रेसियों ने गांधी परिवार से वफादारी जताने के उनको अपनी और आकर्षण करने के लिए स्टंट या ड्रामेबाजी की तमाम हदें पार कर दीं। लेकिन बात करे खरगे की तो वह कुछ और है। उनकी वफादारी में तुच्छ पना नहीं है,और न ही छिछलापन है। तो ऐसा क्या किया है खरगे ने जिससे गाँधी परिवार के वो इतने करीबी है।

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मल्लिकार्जुन खरगे ने गाँधी परिवार से ऐसे ली प्रेरणा !

खरगे ने अपनी वफ़ादारी को कुछ इस प्रकार दर्शाई की उन्होंने अपने बच्चों का नाम गांधी परिवार से प्रेरित हो कर रखा है। खरगे के बेटे-बेटियों के नाम कुछ इस प्रकार है – प्रियंक, राहुल, प्रियदर्शिनी, जयश्री और मिलिंद। बात करे नाम प्रियंक के बारे में तो वो नाम प्रियंका गांधी के नाम से प्रेरित है वही दूसरे बेटे का नाम तो राहुल नाम तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षराहुल गाँधी का है ही। इसी तरह प्रियदर्शिनी जो की इंदिरा गांधी का नाम था उनके नाम पर बेटी का नाम रखा है। खरगे की जीवनी लिखने वाले एचटी पोटे के बताया है की Congress नेता के बच्चों का नाम गांधी परिवार के प्रति उनकी वफादारी का एक उदाहण है। वहीं, खरगे के करीबी मित्र इकबाल अहमद सरादगी ने इसकी दूसरी वजह बताते हुए कहा की खरगे के बच्चों का नाम आंबेडकर और बुद्ध की तरफ उनके वैचारिक झुकाव को दर्शाता है।

खरगे का राजनैतिक सफर !

मल्लिकार्जुन खरगे Congress पार्टी के बड़े नेता हैं। वह 1971 से 2008 तक लगातार 9 बार कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहें। इस दौरान वह कर्नाटक की कांग्रेस सरकारों में राज्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक रहे। तमाम अहम विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली। 2009 में पहली बार गुलबर्गा सीट से लोकसभा चुनाव में उतरे तो वहां भी जीत का सिलसिला जारी रहा। मनमोहन सरकार जब सत्ते में आई तो कैबिनेट मंत्री बनाए गए।

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Congress की कमान अब इनके हाथ !

2014 में वह दोबारा लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए लेकिन तब केंद्र की सत्ता से कांग्रेस बाहर हो गई। तब कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा में अपना नेता बनाया था। 2019 में खरगे लोकसभा चुनाव हार गए। ऐसा पहली बार हुआ था की वह किसी चुनाव में हारे। लेकिन कांग्रेस ने उन्हें जल्द ही न सिर्फ राज्यसभा में भेज दिया। बल्कि गुलाम नबी आजाद के रिटायर होने के बाद उन्हें सदन में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से नवाजा। अब यही कद्दावर दलित नेता कांग्रेस की कमान संभाल रहे है, उनकी गाँधी परिवार के प्रति निष्ठा ही इसकी बड़ी वजह बताई जा रही है। वह गांधी परिवार के भरोसेमंद और कृपापात्र हैं। उन्होंने 1969 में गुलबर्गा सिटी कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष से लेकर 2022 में Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक लंबा सफर तय किया है।

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