कोरोना के कहर के मद्देनजर 24 मार्च से देश बंद का सामना कर रहा है! लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है और केंद्र और राज्य दोनों सरकारें आर्थिक संकट से गुजर रही हैं! हालांकि देश में फिलहाल लॉकडाउन -4 लागू है, कुछ मीडिया चैनलों ने लॉकडाउन 5 के बारे में खबर को चला दिया, जिसमें गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया और इसे गैर-जिम्मेदार बताया!
गृह मंत्रालय ने एक ट्वीट में स्पष्ट किया कि लॉकडाउन -5 के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है और किसी भी मीडिया चैनल के लिए इस तरह की खबर चलाना सही नहीं है! इस ट्वीट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इसमें किए गए सभी दावे रिपोर्टर द्वारा सिर्फ कयास हैं! गृह मंत्रालय इस तरह की किसी भी खबर की पुष्टि नहीं करता है और ऐसा करना गैर जिम्मेदाराना है! बता दें कि देश में लॉकडाउन का पहला चरण 24 मार्च से 14 अप्रैल तक, दूसरा लॉकडाउन 15 अप्रैल से 5 मई तक, तीसरा लॉकडाउन 4 मई से 17 मई और चौथा लॉकडाउन 18 मई से 31 मई तक लागू किया गया था!
#FactCheck
The quoted story claims to have inside details about #Lockdown5, from MHA Sources.All claims made therein are mere speculations by the reporter. To attribute them to MHA is incorrect and being irresponsible.#FakeNewsAlerthttps://t.co/0L1r7eGuUh via @indiatoday
— Spokesperson, Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) May 27, 2020
इससे पहले, एक मीडिया निकाय ने एक लेख लिखा था जिसमें उसने कहा था कि प्रधानमंत्री 1 जून से नरेंद्र मोदी की तालाबंदी के अगले चरण की घोषणा करेंगे! जो 31 मई को लॉकडाउन 4.0 समाप्त होने के बाद लागू हो सकता है! संस्थान ने दावा किया था कि पीएम मोदी 31 मई को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में राष्ट्र को संबोधित करेंगे! यह लॉकडाउन 4.0 का अंतिम दिन भी है और सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी लॉकडाउन 5.0 के बारे में घोषणा कर सकते हैं!
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन -5 का देश के 11 शहरों में लॉकडाउन में सख्ती से इस्तेमाल किया जा सकता है! देश में कोविद के 70 प्रतिशत मामले दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, पुणे, ठाणे, इंदौर, चेन्नई, अहमदाबाद, जयपुर, सूरत और कोलकाता में हैं! सरकार इस रिपोर्ट को लेकर गंभीर है! रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से पांच शहरों अहमदाबाद, दिल्ली, पुणे, कोलकाता और मुंबई में कोविद के 60 प्रतिशत से अधिक मामले पाए गए हैं!