श्री राम मंदिर के बाद अब काशी-मथुरा को हिंदुओं को सौंपने की हो रही बात,कोई और नही KK मोहम्मद ने कहा

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक K.K. Muhammad अयोध्या राम मंदिर को लेकर जो फैसला हुआ उसके बाद एक इंटरव्यू हुआ जिसमे उन्होंने बोला कि डाकूओं को समझाना आसान है, लेकिन कम्युनिस्टों को समझाना आसान नहीं है। उसके बाद उन्होंने एक घटना का जिक्र भी किया और बोला कि चंबल घाटी स्थित बटेश्वर मुख्य मंदिर समेत ओर भी मंदिरों का संरक्षण डाकू निर्भय गुर्जर के सहयोग से हुआ था। निर्भय गुर्जर के मारे जाने के बाद मंदिर पर फिर से खतरा मंडराने लगा था। इसके दोबारा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख K.S. Sudarshan आगे आए थे।

उन्होंने फिर ये बोला, कि जब वो चंबल गए थे तब वहाँ पर डाकूओं का बोलबाला भी था। उन्होंने निर्भय सिंह गुर्जर नाम के एक डाकू को भारतीय धरोहरों की सुरक्षा करने के लिए और मंदिर बनाने की बात बोली है। निर्भय सिंह गुर्जर डाकूओं का मुखिया था। उन्होंने निर्भय सिंह को भारतीय इतिहास और महत्व के बारे में बताया। इसको लेकर निर्भय सिंह ने मंदिरों के संरक्षण के लिए सहयोग देने का आश्वासन भी दिया था। उसके बाद उन्होंने 2-3 साल में प्रसिद्ध बटेश्वर मंदिर को मिलाकर कुल 80 मंदिरों का संरक्षण का काम पूरा करवाया था। उन्होंने ये भी बताया, कि फिलहाल चंबल घाटी में तकरीबन 200 मंदिर हैं।

राम मंदिर को लेकर उन्होंने बोला, कि सभी संरचना की कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिसके आधार पर आप बोल सकते हैं, कि ये मंदिर था, मस्जिद था, या फिर चर्च था और इस संरचना के नीचे पूरा कलश, अष्टमंगल, मूर्तियाँ ये सब इसमें मौजूद थे, जो ये सबूत देते हैं कि वो ढाँचा मंदिर की थी। इसके साथ ही सुग्रीव के बड़े भाई बालि को मारने और 10,000 राक्षसों को मारने के साक्ष्य हैं और ये सभी ये जानते हैं कि ये दोनों काम भगवान राम ने ही किये है।

उसके बाद उन्होंने ये भी बोला कि मुसलमान के लिए ये एक मौके की तरह है कि वो आगे आये और मंदिर निर्माण में सहयोग दें। भले ही उन्होंने ये बात स्वीकार की है, कि भारतीय मुस्लिम को अयोध्या पर फैसले से कोई दिक्कत नहीं है। अफगानी मुस्लिम लोग मंदिरों का विध्वंस करते हैं। कई और मंदिर हैं, जिसका विध्वंस किया गया है, लेकिन लोग उसके बारे में नहीं जानते हैं, क्योंकि वो अयोध्या की तरह ही प्रकाश में नहीं आया है। उन्होंने बोला, कि इसमें कम्युनिस्ट इतिहासकार इरफान हबीब जैसे लोग और जेनएनयू के लोग भी समर्थन देते हैं।

K.K. Muhammad ने ये बोला, ‘कि जैसे मुसलमानों के लिए मक्का मदीना मायने रखता है, बिलकुल वैसे ही अयोध्या भी हिंदुओं के लिए बहुत महत्व रखता है।’ उन्होंने ये भी बोला, ‘कि अगर ये मस्जिद अजमेर शरीफ, ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती या फिर निजामुद्दीन से संबंधित होता तो वो सब उन्ही के साथ खड़े होते, लेकिन ये एक साधारण सा मस्जिद था और हिन्दुओं के लिए ये मुस्लिमों के मक्का-मदीना की तरह है।’ इसके साथ ही उन्होंने एक सवाल का जवाब भी दिया और बोला कि काशी और मथुरा का मंदिर भी हिंदुओं का ही है और वो उसी के हक में आएगा।

मदरसे में पढ़ाई को लेकर कुछ सवाल पूछे गए थे जिसका जवाब देते हुए उन्होंने बोला कि मदरसे में सेमेटिक रिलीजन की पढ़ाई भी होती है। सेमेटिक रिलीजन कहने का ये मतलब था, कि अगर आप मुस्लिम नहीं हैं तो आपको जन्नत नसीब होगा, क्रिश्चन नहीं तो जन्नत नहीं मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने हिन्दू धर्म के बारे में बात करते हुए भी ये बोला, कि इसमें आप राम, कृष्ण, शिव किसी भी भगवान की पूजा कर सकते हो, नहीं भी कर सकते… ये है हिन्दू। साथ ही उन्होंने ये भी बोला, कि मुसलमानो के लिए अलग से एक देश बनाया गया है और वो है, पाकिस्तान। मगर ऐसा हमारे भारत में बिलकुल भी नहीं है, और अगर भारत में ऐसा है भी तो सिर्फ बहुसंख्यक हिन्दुओं की वजह से ही है। भारत को हिन्दू जैसे धर्म की जरूरत है। अगर भारत सेक्युलर है तो हिन्दू की वजह से ही है।

उसके बाद उन्होंने ये भी बोला, कि जो मुसलमान कह रहा है कि उनके पूर्वज राम-कृष्ण नहीं है, तो इसका मतलब तो यही है ना की वो भारत के ही मुस्लिम नहीं है, वो किसी और देश के मुसलमान हैं। उन्होंने अपने एक शिक्षक अबू बकर के बारे में ये बताया कि वो बहुत ही टिपिकल मुल्ला थे। जो रोज सुबह मस्जिद भी जाते थे, नमाज भी पढ़ते थे, लेकिन वो उन सब को रामायण और महाभारत भी पढ़ाते थे। उन्होंने बोला, कि रामायण- महाभारत सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि अब साउथ एशियन के देश की भी धरोहर है।

इस टाइम उनमे से एक दर्शक ने उनसे सवाल पूछा और बोला कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा दिखाया गया है कि इसमें किसी की हार नहीं हुई है। हिन्दू-मुस्लिम एक ही है, मगर इसमें सबसे बड़ी हार मार्क्सवादियों की हुई है। जिसको मीडिया वालों ने दिखाया ही नहीं है इस पर क्या है उनकी राय? तो K.K. Muhammad ने भी इसका जवाब दिया और बोले, ‘कि 34-35 साल की लड़ाई के बाद अब मार्क्सवादियों और वामपंथी इतिहासकारों की बड़ी हार हुई है।’ उन्होंने कुछ कम्युनिस्टों का उदाहरण देते हुए ये बोला, कि भले ही ये लोग अच्छे हैं, मगर इरफान हबीब जैसे कुछ इतिहासकार बिल्कुल भी अच्छे नहीं है, जो अब पूरी तरह से फेल हो चुका है।

उन्होंने ये बोला, कि इसको टाइम्स ऑफ़ इंडिया जैसे मुख्य समाचार पत्र तरजीह देते हैं। K.K. Muhammad ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू दिया था जिसमे उन्होंने बात करते हुए ये बोला, ‘कि उन्होंने समाचार पत्र को एक बयान दिया था। जिसको उन्होंने बस एक बार ही प्रकाशित किया और फिर दोबारा उन्होंने बिना उनसे पूछे, बिना उनकी अनुमति लिए अपने तरीके से ही अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए इसको यूज किया गया, वो ये कि K.K. Muhammad अयोध्या मामले से जुड़े हुए नहीं है।