Tuesday, September 27, 2022

बीवियों से परेशान पतियों ने अपनी ही जिंदा पत्नियों का कराया पिंडदान

हिन्दू धर्म में पितृपक्ष के मौके पर लोग अपने पूर्वजों और मरे हुए लोगों को पिंडदान करते हैं, ये तो आप सबको पता है. पर क्या अपने कभी सुना या देखा है कि कोई जिंदा मनुष्य का ही पिंडदान करे. आमतौर पर ऐसा कभी होता नहीं है, क्यूंकि पिंडदान तो म रने के बाद ही किया जाता है. लेकिन मुंबई में एक ऐसा ही मामला सामने आया है.

मुंबई में बानगंगा टैंक के किनारे कई लोगों ने अपनी जिंदा पत्नियों का पिंडदान किया. ये सभी ऐसे पत्नी पी ड़ित पति थे, जिनका या तो तलाक हो चुका है या फिर उनके पारिवारिक विवाद को मामला कोर्ट में चल रहा है. यहां करीब 50 पत्नी पीड़ित पतियों ने अपनी जिंदा पत्नियों का पिंडदान कराया है. इन सभी लोगों ने शादी की बुरी यादों और अनुभवों से छुटकारा पाने के लिए पूरे विधि-विधान के साथ अपनी जिंदा पत्नियों का पिंडदान किया. इनमें से एक शख्स ने जहां मुंडन भी कराया है, वहीं बाकियों ने सिर्फ पूजा-पाठ में हिस्सा लिया है.

ये फाउंडेशन करता है पत्नी पी ड़ित पतियों की मदद

दरअसल, ये पिंडदान का यह प्रोग्राम पत्नी पीड़ित पतियों की एक संस्था वास्तव फाउंडेशन की तरफ से मुंबई में आयोजित किया गया था. वास्तव फाउंडेशन के अध्यक्ष अमित देशपांडे ने बताया कि ये पिंडदान इसलिए किया गया है, क्योंकि ये सभी लोग अपनी पत्नियों के उत्पीड़न से लंबे समय से परेशान चल रहे थे. इनमें से ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जिनका या तो अपनी पत्नियों से तलाक हो चुका है या फिर वो अपनी पत्नी को छोड़ चुके हैं. मगर उनकी बुरी यादें और पुराने अनुभव उन्हें अभी भी परेशान कर रही थी. इन्ही बुरी यादों से मुक्ति के लिए ये आयोजन किया गया है.

बुरी यादों से छुटकारे के लिए पतियों ने किया ये काम

उधर, पिंडदान करने वाले पतियों का मानना है की महिलाएं अपनी आजादी का फायदा उठाकर पुरुषों का शोषण करती हैं, लेकिन उनके आगे समाज में और कानून के समक्ष पुरुषों की सुनवाई नहीं होती है. अपनी पत्नियों के साथ उनका रिश्ता एक तरह से मर चुका है, इसलिए पितृपक्ष के मौके पर ये पिंडदान किया गया है, ताकि उनकी बुरी यादों से उन्हें छुटकारा मिल सके. वास्तव फाउंडेशन इस तरह का आयोजन हर साल देश के अलग-अलग शहरों में करवाता है, ताकि ऐसे पीड़ित पतियों को जो अपनी पत्नियों के उत्पीड़न को भुला नहीं पा रहे हैं. इससे उन्हें निजात दिलाई जा सके.

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