Tuesday, September 27, 2022

क्या आप जानते हैं कि वेश्यालय की मिट्टी से बनाई जाती है मां दुर्गा की प्रतिमा….

अगले हफ्ते से माँ दुर्गा का पर्व नवरात्री शुरू होने वाला है. ये त्यौहार देश के हर कोने में मनाया जाता है. उत्तर भारत और उत्तर पूर्व में नवरात्रि का त्यौहार बड़े ही हर्षो उल्लास से मनाया जाता है.पू रे नौ दिन दुर्गा माँ की पूजा पाठ विधि विधान के साथ की जाती है. माता की स्थापना से पहले मां की मूर्ति को तैयार किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां की मूर्ति की मिट्टी कहां से लाई जाती है? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मां दुर्गा की मूर्ति का निर्माण करने के लिए वेश्यालय की मिट्टी का प्रयोग किया जाता है.

हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक मां की मूर्ति बनाने में गंगा की मिट्टी, गो मूत्र, गोबर और चौथी वेश्यालय की मिट्टी अहम होती है. यह परंपरा सदियों में चली आ रही है. आइए जानते हैं वेश्यालय की मिट्टी से ही मां दुर्गा की मूर्ति को तैयार क्यों किया जाता है?

ऐसे होता है मूर्ति का निर्माण

कानपुर के रहने वाले पंडित राज नारायण का कहना है कि समाज में वेश्याओं को सामाजिक रूप से अलग रखा जाता है. जिनकी अहम भूमिका को दर्शाते हुए वेश्यालय के आंगन की मिट्टी से मां दुर्गा के मूर्ति का निर्माण किया जाता है, जिससे उनकी भी महत्वता बढ़ सके और उन्हें भी पवित्र माना जाए.

वेश्यालय की मिट्टी से दुर्गा माता की मूर्ति के बनाने के पीछे कई सारी मान्यताएं हैं. माना जाता है कि पहले मंदिर के पुजारी वेश्यालय के बाहर जाकर वेश्याओं से उनके आंगन की मिट्टी मांगकर लाते थे और उसके बाद मंदिर के लिए मूर्ति बनाई जाती थी. धीरे-धीरे परंपरा बढ़ती गई और नवरात्रि पूजन के लिए जो मूर्तियां बनाई जाती हैं, उसमें भी इस मिट्टी का उपयोग होने लगा.

ये कहती है पौराणिक कथाएं

कहा जाता है कि पुरातन काल में एक वेश्या मां दुर्गा की बहुत बड़ी भक्त थी. उसे हर बार तिरस्कार का सामना करना पड़ता था.परेशान होकर उसने मां दुर्गा के सामने प्रार्थना की कि उसे हर बार तिरस्कार का सामना करना पड़ता है, माता उसे तिरस्कार से बचाने के लिए आप कोई रास्ता सुझाएं.

तब उसकी प्रार्थना सुन मां दुर्गा ने उसकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए अपने भक्तों से कहा था कि वह उनकी मूर्ति का निर्माण वेश्यालय के आंगन से लाई गई मिट्टी से ही करें. माता दुर्गा ने वरदान दिया कि वेश्यालय की मिट्टी से बनाई गई मूर्ति की स्थापना करने से ही उनका व्रत फलीभूत होगा और तभी से मां दुर्गा की मूर्ति वेश्यालय के आंगन से लाई गई मिट्टी से बनाई जाने लगी.

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