आज है तुलसी विवाह, जाने क्या है तुलसी विवाह की विद्धि और हिन्दू धर्म मे इसका महत्व

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आज 8 नवंबर के दिन देवउठान एकादशी की शुभ घडी आयी है. भारतीय मान्यता के अनुसार आज के दिन लोग आपने आंगन में लगी तुलसी को एक दुल्हन की तरह सजाते हैं, उनका हार शृंगार करते हैं.

हिन्दू धर्म मे मान्यता के अनुसार इससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हो जाते है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है. तो आज हम आपको बताने जा रहें हैं, तुलसी विवाह का शुभ महूर्त और तुलसी विवाह करने की सही विद्धि.

तुलसी विवाह का शुभ महूर्त

आपको बता दें की तुलसी विवाह का शुभ महूर्त द्वादशी तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 9 नवंबर दोपहर 2 बजकर 39 मिनट के बीच रहेगा. इस बीच आप अपने आँगन में लगी तुलसी जी का विवाह कर सकते है.

तुलसी विवाह करने की विद्धि

सबसे पहले अपने घर के आंगन में पड़ी तुलसी माँ के लिए एक छोटा सा मंडप सज़ाये. तुलसी माँ के ऊपर लाल चुनरी को ओढ़ लें. अगर आपकी इच्छा हो तो आप लाल रंग की साडी भी तुलसी पूजा के दौरान उन्हें पहना सकते है. साथ ही कुछ चुडिया पहना कर उनका हार शृंगार कर सकते है.

इसके बाद आप शालिग्राम जिसे भगवान् विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है, तुलसी जी के बाई तरफ बैठाएं. शालिग्राम पर थोड़ा हल्दी वाला दूध और तिल चढ़ाएं. इसके बाद आप माँ तुलसी जी को नारियल भेंट करें और शालिग्राम के सिंहासन को हाथ में लेकर तुलसी जी के चारों तरफ फेरें ले.

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क्यों करते हैं तुलसी विवाह

आपको बता दें की तुलसी जी को भारत के कुछ हिस्सों में वृंदा नाम से भी जाना जाता है, भारतीय पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वृंदा ने एक बार भगवान् विष्णु को एक श्राप दे दिया था. इस श्राप के चलते भगवान् विष्णु के शरीर का रंग काला पड़ गया था. उसके बाद से ही शालिग्राम को तुलसी के चरणों के पास रखा जाता है और तुलसी पूजन को शालिग्राम के बिना अधूरा माना जाता है. हिन्दू धर्म में मान्यता है की जो भी इंसान देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह को सम्पन्न करवाता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है.