महाराष्ट्र का गठबंधन किसी भी पल टूट सकता है? अंदर ही अंदर कांग्रेस शिवसेना से नाराज

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महाराष्ट्र में वैसे तो काफी ज्यादा मेहनत करके ही गठबंधन की सरकार बनाई है और इसके लिए कही न कही उध्दव ठाकरे को भी काफी ज्यादा पापड़ बेलने पड़े थे तो सब लोग अच्छे से जानते ही है मगर अब ऐसे टाइम में जब एक दो नहीं बल्कि तीन-तीन पार्टिया सरकार चला रही है तो फिर उनके बिच में मतभेद होना भी बहुत बड़ी बात है और इसमें किसी को भी कोई संशय भी नहीं होना चाहिए। ये बात तो आप भी मानते होंगे, मगर इन दिनों काफी ज्यादा अंदर मसले चल रहे है।

कांग्रेस के नेताओ के हिसाब से ये बताया जा रहा है कि आज के टाइम में उनकी महाराष्ट्र में जैसी उपेक्षा हुई है। वैसी कही पर भी नहीं हुई है चाहे तबादले से जुड़े फैसले लेने हो या फिर कोई मेजर केबिनेट का फैसला हो या कुछ और ही क्यों न हो? हर जगह पर अजित पवार और उद्धव ठाकरे ही फैसले आदि ले रहे है और कांग्रेस पार्टी के नेताओ को कोई भी खास तवज्जो तक नहीं दी जा रही है।

बाबा साहेब थोरेट को लेकर के एक कांग्रेस के नेता ने मीडिया समूह में ये बोला है, कि वो हमको समझने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें देखकर के लगा जैसे वो खुको ही समझा रहे है। अगर कांग्रेस लगातार इस तरह से गठबंधन में रहती है और दबती रहती है तो फिर वो दिन भी दूर नहीं है जब इसे दोयम दर्जे की पार्टी माना जाने लगेगा और कही न कही ये उसकी महाराष्ट्र की मुख्य राजनीति से अंत की शुरुआत मानी जा सकती है।

अब ऐसे में कांग्रेस कब खुन्नस खाकर के बड़ा स्टेप ले ये कोई भी नहीं जानता है और ये चीज उद्धव ठाकरे की कुर्सी के लिए लम्बे टाइम से खतरा ही बनी हुई है जो की कही न कही एक भू बड़ा रिस्क फैक्टर कहा जाता है।