Tuesday, September 27, 2022

कांग्रेस फिर किसी बड़ी सा’जिश का इशारा कर रहे थे? समझिये ….

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस आजकल अपने कर्मों का ही परिणाम भुगत रहे हैं और यही वजह है कि आज जो पार्टी पूरे देश में राज किया करती थी वह महज दो ही राज्यों में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए तो ऐसा लगता है कि वह दिन भी अब ज्यादा दूर ही नहीं है जब भारत के चुनावी नक्शे से पूरी तरीके से कांग्रेस का नाम खत्म हो जाएगा और यही कारण है कि खुद को दोबारा से खड़ा करने के प्रयासों में जुटी हुई कांग्रेस पार्टी आजकल भारत जोड़ो यात्रा पर निकली हुई है!

दरअसल कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में यह यात्रा निकाल रही है लेकिन अगर देखा जाए तो कांग्रेस अपनी इस यात्रा के माध्यम से भारत तोड़ने का काम अधिक करती हुई दिखाई दी है वहीं भारत जोड़ो यात्रा के बीच ही कांग्रेस ने एक बार फिर से ऐसा काम कर दिखाया है जिसके जरिए वह अपनी भारी फजीहत करवा रही हैं!

दरअसल यह यात्रा अब बढ़ते बढ़ते आर एस एस के निकट तक आ पहुंची है हाल ही में कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट से आरएसएस की निकर की तस्वीर शेयर की थी जिसमें धुआं उठ रहा था और जिसके बाद एक भारी वि वाद खड़ा भी हो गया है वहीं उल्लेखनीय है कि खाकी निकल कुछ समय पहले आरएसएस का ड्रेस कोड हुआ करता था किंतु अब वह बदल चुका है!

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी की इस हरकत पर बीजेपी भी बुरी तरीके से विफल गई है और उस पर देश के माहौल को बिगाड़ने का इल्जाम लगाने लग गई है बीजेपी का कहना है कि इसके माध्यम से मुख्य विपक्षी दल देश को हिं सा के लिए उत्साह रहा है! लेकिन यह मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा कांग्रेस पार्टी के द्वारा आर एस एस की निक्कर वाली ट्वीट पर राजनीति हो रही थी इन सब के बीच कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने एक कदम आगे बढ़ते हुए आर एस एस की निक्कर वाली फोटो के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर को जोड़ दिया है और इस तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी भी आर एस एस की ही पोशाक में दिखाई दिए हैं इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि निक्कर में आ ग लग गई!

वही ऐसे में और सवाल तो खड़ा होता है कि आर एस एस की निक्कर के साथ प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर को जोड़कर कांग्रेस पार्टी और उनके सांसद क्या संदेश देना चाह रहे हैं? क्या वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उकसा रहे थे या फिर किसी बड़ी साजिश का इशारा कर रहे हैं? यह बात तो समझ में आती है कि जो सरकार सत्ता में बैठी हुई है उनके विरुद्ध बोलने का आपको पूरा अधिकार है लेकिन विरोध की आड़ में प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस प्रकार का काम करेंगे तो यह कहां तक सही है?

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