चीन में जितने भी मस्जिद, मदरसे थे, सब पे ताले लगाने का आदेश जारी, लेकिन बरेली के मौलवी क्यों

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Pic Credit - Google Images
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पाकिस्तान भले ही चीन को अपना दोस्त और मुसलमानों का हितैषी समझता हो. लेकिन सच तो यह है की चीन लगातार अपने देश में मुस्लिमों का जीना हराम कर रहा है. इसी कड़ी में अब हिंदुस्तान में भी उलेमा और मुस्लिम सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया हैं.

खबर आ रही है की, सोमवार के दिन चीन में चल रहे मुसलमानों पर जुल्म और धार्मिक स्थल, मदरसों पर तालाबंदी और बुर्के पर रोक लगाए जाने के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया हैं.

मीडिया से बात चीत करते हुए तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है की, “चीन में मुसलमानों पर जुल्म किया जा रहा है. बेगुनाह लोगों को जेलों में कैद किया जा रहा है. भारत सरकार से हमने मांग करते हुए कहा कि चीन में मुसलमानों पर हो रहे जुल्मों पर दखल दें. वहां नमाज पढ़ने, रोजा रखने पर रोका जा रहा है.”

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा है की, “वहां के मुसलमानों को इस्लाम के खिलाफ बोलने के लिए मजबूर किया जा रहा है. मस्जिद, मदरसों में ताले डाल दिए गए हैं. मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर रोक लगा दी गई है. समाजसेवी नाजिम बेग ने कहा कि चीन में मानवाधिकारों और धार्मिक अधिकारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया जा रहा है. इस संबंध में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेक्ट पहुंचकर अधिकारियों को दिया है.”

अब देखना यह होगा की क्या असदुद्दीन ओवैसी भी तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का समर्थन करते हुए चीन के अत्याचारों का विरोध करता हैं या नहीं. अब, जब भारतीय सरकार को भारत के मुसलमानों द्वारा आधिकारिक विरोध का ज्ञापन मिल चूका हैं. तो क्या भारत इस मुद्दे को अंतरष्ट्रीय स्तर पर उठाने में कामयाब होगा या नहीं, यह तो आने वाले वक़्त में पता चलेगा.