हिंदुओं से नफरत करने वाला प्रोफेसर ने कहा,अमिताभ मोदी का चमचा क्यों हुआ अस्पताल में भर्ती?

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शिक्षित इंसान समझदार ही हो ये बात जरुरी तो नहीं होता। काफी बार पढ़े-लिखे इंसान भी ऐसी जाहिलियत भरी बाते करते है कि मानवता भी स्तंब्ध रह जाये। अशोक स्वेन इस बात का बिलकुल स्टिक उदहारण है जो इस बात को साबित करते है कि कुत्सित मानसिकता वाला इंसान केवल किताबो के सहारे ही पद को हासिल कर सकता है, उसका संवेदनाओ से कोई सरोकार नहीं होता है।

एक तरफ अमिताभ बच्चन जिन्हे कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पूरा देश उनकी सलामती की कामनाये कर रहा है। प्रशंसक हो या फिर कोई आलोचक उन्हें जल्दी ठीक करने का आदेश दिया जा रहा है और दूसरी तरफ स्वीडन की उपसला यूनिवर्सिटी में पीस एन्ड कोन्फ़्लिकट के प्रोफ़ेसर अशोक स्वेन उन्हें मोदी का चमचा बोलकर उनपर अपनी कुंठा निकाल रहे है।

अशोक स्वेन अपने ट्वीट में अमिताभ बच्चन के लिए लिखते है, ”कि ये पीएम नरेंद्र मोदी का चमचा है, कोरोना के हल्के से लक्षण पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ है इसने आयुष मंत्रालय की voodoo दवाइयाँ क्यों नहीं ली। ये धोखेबाज बिलकुल ऐसी है, जैसे भाजपा के नेता कैंसर होने पर सीधे अमेरिका भागते है। मगर बेवकुफो को गोमूत्र पिने को बोलते है।”

ये बात इस अकेले ट्वीट की नहीं है स्वीडन के इस प्रोफ़ेसर को अमिताभ बच्चन से या उनकी बॉलीवुड यात्रा से कोई भी लेना-देना नहीं है उनका गुस्सा तो मोदी सरकार पे और हिन्दुओ पर है जिसको लेकर वो सदी के महानायक को भी नहीं बक्शना चाहते और उनके काम को भी नजरअंदाज करके वो सिर्फ उन्हें मोदी के प्रशंसक के तौर पर घेर रहे है।

अशोक स्वेन क्या है, इसके लिए आपको उसके और भी ट्वीट देखने होंगे। जो ये बात बताते है कि आखिर मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करने वाले अमिताभ बच्चन को जो कोरोना हुआ है वो उनके लिए संवेदना व्यक्त करने का मसला ना होकर जहर उगलने का विषय क्यों है? इस ट्वीट के चलते मालूम पड़ता है कि उन्हें केवल हिन्दुओ से ही नफरत नहीं है बल्कि चीनियों के प्रति भी उनके मन में बहुत ज्यादा प्रेम है।

इसके आलावा भी उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार के काफी सारे प्रशंसक और बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर से भी इतनी दिक्क्त है कि वो तबलीगी जमात पर जो सवाल उठे थे उन सबको भी वो काउंटर करने के लिए अनुपम खेर की माता और भाई के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर भी उनके ऊपर भी वो निशाना साधने से नहीं चुके और उनसे भी पूछते है कि आखिर ये लोग कौन-सी जमात से है।

उस टाइम अशोक स्वेन के जहर उगलने का सिलसिला इतने सब से भी नहीं थमा तो वो आगे छत्रपति शिवा जी का भी अपमान करने वाली कॉमेडियन के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाते है। लेकिन अर्णब गोस्वामी समेत भारतीय पत्रकारों के प्रति उनके मन में कुंठा साफ नजर आती है। वो स्वीडन में बैठे-बैठे ही विकास दुबे के एन्काउंटर को भी वो स्पष्ट रूप से हत्या बताते है और भगवा को आतंक का पर्याय बताने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते।