प्रियंका रेड्डी हादसे पे अनुपम खेर का फूटा गुस्सा, अमित शाह से कहा, इस कानून को सिर्फ पास करवा दे

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Pic Credit - Google Images
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सांसद असदुद्दीन के क्षेत्र हैदराबाद जो की तेलंगाना की राजधानी भी है, वहां से जैसे ही खबर आयी की 27 साल की एक पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गयी है और उसकी लाश को जला दिया गया है तो पूरा देश एक वक़्त में सकते में आ गया था.

इसी कड़ी में अनुपम खेर ने भी देश के गृहमंत्री अमित शाह से कानून बनाने की मांग कर डाली. लेकिन यह कानून मानवाधिकार वालों को शायद पसंद न आये क्योंकि मानवाधिकार केवल आतंकियों, शहरी नक्सल और बलात्कारियों के लिए ही होता हैं.

अनुपम खेर की माने तो अमित शाह को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिसमे आरोपी का आरोप तय होते ही उसे शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके के चौंक में खड़ा करके गोली मारी जाये. अनुपम खेर इसी सन्दर्भ में ट्विटर पर लिखते हैं की, “प्रियंका रेड्डी के साथ हुए वहशी बलात्कार करने वालों को बीच चौराहे पर उल्टा लटका कर सीधा गोली मार देनी चाहिए. आदरणीय अमित शाह जी गृह मंत्री के रूप में आपने काफ़ी साहसिक निर्णयात्मक निर्णय लिए है. बलात्कारियों को तुरंत मौत की सजा हो जानी चाहिए. बस ऐसा एक क़ानून पास करवा दीजिए.”

आपको बता दें की इस मामले में भी दिल्ही की निर्भया जैसे ही काण्ड हुआ है, निर्भया और उसके दोस्त को अगले स्टेशन पर छोड़ने के लिए मदद का बहाना बनाकर उसके साथ बलात्कार किया, वहीं हैदराबाद में पंचर स्कूटी को ठीक करने की मदद का झांसा देकर लड़कों ने इस घटना को अंजाम दिया.

प्रियंका रेड्डी की छोटी बहन ने बताया है की बुधवार रात नौ बजकर 22 मिनट पर उसकी इस बड़ी बहन से बात हुई और बहन ने बताया की वह टोल प्लाजा के पास है. मेरी स्कूटी पंचर हो गयी थी तो किसी ने उसकी मदद करने की पेशकश की है. स्कूटी ठीक होते ही वह घर आ जाएगी. लेकिन नौ बजकर 44 मिनट में जब दुबारा फ़ोन किया तो फ़ोन स्विच ऑफ आया.

पुलिस को शिकायत दर्ज़ करवाने गए तो पुलिस ने 24 घंटे बाद आने को कहा, कानून के हिसाब से. लेकिन पुलिस ने परिवार वालों से बदमिजी की. बात जब मीडिया में उछली तो सुबह तक पुलिस ने 16 टीमें बनाई और ढूंढ़ना शुरू किया कुछ ही घंटों में आरोपियों और लाश को ढून्ढ निकाला गया.

परिवार वालों का कहना है की पुलिस ने रात को ही अगर हमारी बात मान ली होती तो शायद प्रियंका जिन्दा होती. लेकिन बाबा साहब आंबेडकर जी ने संविधान में लिखा है की अगर कोई व्यक्ति घर से गायब होता है तो उसकी रिपोर्ट 24 घंटे बाद ही दर्ज़ करवाई जा सकती है, ऐसे में पुलिस अपना काम ही कर रही थी.