अयोध्या में बाबरी मस्जिद की तश्वीर को देखकर ही नई मस्जीद बनाई जाएगी,क्योंकि पुरानी मस्जिद तो अब है नही..

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अयोध्या (Ayodhya) में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवंटित पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद बनाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। अयोध्या में मस्जिद के निर्माण के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम का एक ट्रस्ट बनाया गया है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष अदनान फारुख अली शाह “मियां साहब” ने कहा है कि बकरीद के बाद, मस्जिद बनाने की योजना पर बातचीत आगे बढ़ेगी। वर्ष के अंत तक अयोध्या में रौनाही में मस्जिद का निर्माण शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। नई मस्जिद भी पुरानी की तरह ही होगी।

अदनान फर्रुख अली शाह के अनुसार, अयोध्या में बाबरी मस्जिद की पुरानी तस्वीरों के आधार पर एक नई मस्जिद तैयार की जाएगी। नए निर्माण को आलीशान रूप देने के लिए, दुनिया भर के पुरातत्वविदों और कारीगरों की सलाह मांगी जा रही है। नई मस्जिद का शान-ओ-शौकत बाबरी मस्जिद की तरह होना चाहिए, ताकि लोगों के दिमाग में इसकी याद ताजा रहे।

अदनान फर्रुख अली शाह, कंपनियां सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, कई देशों की कंपनियों ने मस्जिद के निर्माण में रुचि दिखाई थी, लेकिन विश्वास न बनने के कारण निर्णय नहीं हो सका। ट्रस्ट का उद्देश्य ऐसी मस्जिद का निर्माण करना है जैसा देश के मुसलमान चाहते हैं। सरकार द्वारा आवंटित पांच एकड़ भूमि पर मस्जिद के अलावा, इंडो-इस्लामिक रिसर्च सेंटर, डिजिटल लाइब्रेरी और तकनीकी कॉलेज बनाने की योजना है। यह भूमि रौनाही की ग्राम पंचायत धनीपुर में रामजन्मभूमि से 24 किमी दूर है। जमीन फिलहाल कृषि विभाग के पास है। ट्रस्ट को उनके नाम के हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।

मस्जिद परिसर में एक डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएगी। इस बारे में, मियां साहब ने कहा कि यह पुस्तकालय दुनिया के किसी भी कोने से सुलभ होगा और लोग अपनी सुविधानुसार अपनी पसंद की किताबें डाउनलोड कर सकेंगे। लाइब्रेरी में दुनिया की सभी भाषाओं की किताबें होंगी।